Gyanupvan

पिता का प्रेम

मधुर प्रेम जिनका था मुझपे,
पर ना दिखाना जाने वो।

जिनकी वाणी मे कठोरता,
मन मे भरी कोमलता हो।

है नभ से भी सर्वोपरि,
जिनका हृदय इतना विशाल।

अपने सपनों को त्याग नयन से,
रखे हमारे सपने सम्भाल।

अपने अरमनो का दे बलिदान,
रखे हैं हृदय मे हमारे अरमान।

जिनके लिए सब व्यर्थ निरा है,
जिनसे हमारी है पहचान।

कठिन श्रम कर अथक प्रयास कर,
जिसने दी हमें प्रसन्नता।

हिम्मत रखना कभी ना हारना,
हमने है जिनसे सीखा।

बड़ों का मान छोटो को प्यार,
देना ये जाना जिनसे।

कभी राम बन, कभी कृष्ण बन,
ईश्वर भी आए धरती पे।

तब जाकर पाया है प्रभु ने,
आपके प्यार का परमानंद।

नभ से भी महान, उस देव समान,
का करते हैं हम वन्दन।

उनके प्रयास और बलिदान को,
व्यर्थ न जाने देंगे हम।

हे! पिता महान, आप धन्य हो,
जिसने दिया मुझे जीवन।

सपनें

सपनें बडे सबकी आँखों में,
पूरा करना मुश्किल है |

लेकिन जब ठान लें तो,
कुछ भी नहीं नामुमकिन है |

पूरा लगा कर अपना यत्न,
कोशिश करते रहना है |

हार मान कर नहीं बैठना
अब तो बस कुछ करना है |

सपनें करें साकार हम,
कुछ ऐसा जतन करना है |

सफलता को छू कर ही
हमको दम भरना है |

थकने वाले हम तो नहीं,
हमको बस चलना है |

अपनी राह को स्वयं प्रशस्त कर
आगे बढ़ते रहना है |
आगे बढ़ते रहना है |

जय-जय हो लाल तुम्हारी

भारत धरा पुकारे, जय-जय हो लाल तुम्हारी,
तुमसे ही अस्तित्व है, तुम ही शान हमारी।।

तुझ जैसा जो लाल मिला, हुई है गोद पावन मेरी,
तुमने ही बतलाया, दुनिया को कीमत मेरी।।

तुझ मे छिपा है मेरा भविष्य, तुम ही जान हमारी,
भारत धरा पुकारे, जय-जय हो लाल तुम्हारी।।

चलो सदा विजय के पथ पर, तुमको ना रोक सके कोई,
स्वयं करो अपनी राह निश्चित, जिसको ना मोड़ सके कोई।।

तुम धन्य हो लाल मेरे, तुम्हे लग जाये उम्र मेरी,
भारत धरा पुकारे, जय-जय हो लाल तुम्हारी।।

एक लाल था नरेंद्र वो, जिसने शून्य से शिखर दिखाया,
इस बार भी एक नरेंद्र है, जिसने उन्हीं नियमो को अपनाया।।

योग, तपस्या, ध्यान और स्वच्छता दोनों की थी सीढी,
भारत धरा पुकारे, जय-जय हो लाल तुम्हारी।।

एक बार नहीं बारम्बार मुझे नरेंद्र एक चाहिए,
जो मर मिटे मेरी मर्यादा के लिए ऐसा सपूत चाहिए ।।

जो विश्वगुरु मान कर, पूजा करे सदा मेरी,
भारत धरा पुकारे, जय-जय हो लाल तुम्हारी।।

हमारा दोस्त किसान

न थकता है न लगती ठण्ड,
न गर्मी की धूप से घबराता,
न दिखावा उसे है भाता |


न भूख तड़पा सकी जिसको,
न प्यास का एहसास सताता,
देख किसी का धन वैभव,
न मन उसका है ललचाता |


खेती की प्यास देखकर,
वह थोड़ा सा सहम जाता,
धरती का बेटा है वो,
सूखी सी भूमि जोतकर,
हरियाली धरा पर फैलाता,
उसे यही काम है भाता,
सब्जी और अनाज उगाता |


अमीर ना जानता है ये,
अनाज कितनी मेहनत से आता |


उस किसान से पूछो,
एक दाना कैसे है कमाता |


ना हो अन्न तो हर इन्सान,
भूखा ही रह जाता,
अनजाने में ही एक किसान,
हमारा दोस्त बन जाता |

देश की बेटी

भारत की पावन भूमि पर,
हमें नाज है पैदा होकर ।

शूरवीरों की धरती यह,
सिखलाती ना किसी से डर ।

तू लक्ष्य बना ले अपना एक,
दिखला दे सफल होकर ।

बेटा तो क्या, बेटी यहा,
लेती है सबसे टक्कर ।

वह लड़ती है, वह मरती है,
अपने देश की आन पर।

फिर तुम क्यू होते हो दु:खी,
इनके पैदा होने पर।

मन हर्षित है मन पुलकित है,
आज बेटी की इस सफलता पर।

आँगन की खुशी ही नही देश की शान है,
गर्व करो इस स्वर्ण धरा पे उसको पैदा कर।

माँ

माँ ममता की मुर्ति
माँ जीवन का आधार ।
इसके बिना तो यह जग
बिल्कुल ही निराधार ।।

माँ ही जीवन देती है
जिससे सफल संसार ।
माँ का फिर भी है, अधम नर
भूल जाए उपकार ।।

आज अगर जीवन मिला
तो माँ ही उसका आधार
उसके बिना तो
निर्जन यह संसार ।।

माँ से ही बने
यह घर परिवार ।
फिर भी पाते ही सफलता
माँ ही लगे बेकार ।।

जो लुटाई तुम पे ममता
न्यौछावर कर दिया प्यार ।
उस माँ से क्यूँ
करे है नर तू दुर्व्यवहार ।।

स्वयं भूखे रह कर
करती तेरा इन्तजार ।
दो मीठे जो वचन बोल दे
बुढापा ना होगा अपार ।।

दु:खी हो रोती किसीसे न कहती
सुने तेरे ताने की टंकार।
स्वय को कोसती, कही तो कमी थी
दिए जो संस्कार ।।

प्यारा – भारत

एक प्यारा – सा घर था अपना,
सुन्दर भारत का था सपना |


उस पर गड़ी बुरी नजर,
शुरू हुआ गुलामी का कहर |


घर में घुस आए वो,
हम पे धाक जमाए वो |


हुआ सत्यानाश रुका विकास,
दुश्मन में ली जब यहाँ की साँस |


लेकिन हम भी भारतवासी,
चूम लेंगे हँसकर फाँसी |


अगर बात आन पर आए ,
दुश्मन जड़ से मिट जाए |


हम छोड़ेंगे न उसको,
जिसने छुआ माँ के तन को |


दुश्मन को घर से भगाएँ,
एक सुन्दर भारत बनाएँ |

ऐ शहीदों ! शत – शत नमन

खुली हवा में साँस दी,
हमको जीवन की आस दी,
तुमको समर्पित है ये मन,
ऐ शहीदों ! शत – शत नमन |

जकड़ी जंजीरों से छुड़ाया,
माँ भारत का ताज लौटाया,
तुमसे ही है ये वतन,
ऐ शहीदों ! शत – शत नमन |

निडर होके सब त्याग दिया,
आँचल का दाग साफ़ किया,
इसपे लुटा के तन और मन,
ऐ शहीदों ! शत – शत नमन |

इस भारत माँ के लिए,
अपनी माँ को छोड़ के,
चल दिए तोड़ सारे बन्धन,
ऐ शहीदों ! शत – शत नमन |

हम भारत माँ की सन्तान

मेरी भारत माँ का अभिमान,
तोड़ने की ली गर जिसने ठान |


तो हम लेलेंगे उनकी जान,
करेंगे न बर्दाश्त अपमान |


माँ है हमारी स्वाभिमान
इसके लिए भले जाए जान |


न्यौछावर कर अपना प्राण,
बचाएँगे हम इसकी शान,
हम भारत माँ की सन्तान |


चीन हो या हो पाकिस्तान,
छोड भगेंगे सब मैदान |


हमको हराना नहीं आसान,
करेंगे तेरा काम तमाम |


खड़े सरहद पर हम सीना तान,
बचाने अपनी माँ की आन,
हम भारत माँ की सन्तान |

सावन

हरियाली फैली चहुँ ओर,
छाई है घटा घनघोर,
रिमझिम बारिस का है शोर,
पंख फैलाए नाचे मोर |

ऋतु है ये सुहानी आई,
हरी चूड़ियों ने चूमी कलाई,
खुश हो सभी में तीज मनाई,
भाइयों ने राखी बँधवाई |

धान की फसल लहराएँ चहुँ ओर,
बिजली के कड़कने का शोर,
पवन करे भाव विभोर,
सुहावना मौसम बड़ा चितचोर |

मन को भाया है सावन,
झूम उठा खुशियों से मन,
झूला देख लौटा बचपन,
काश ! ऐसा ही हो हर मौसम |